ऑप्शन ट्रेडिंग क्या होती है?

राजेश पालशेतकर
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 ऑप्शन ट्रेडिंग एक प्रकार की वित्तीय ट्रेडिंग है, जिसमें निवेशक एक विशेष अधिकार खरीदते या बेचते हैं, लेकिन यह जरूरी नहीं कि उसे वह अधिकार उपयोग करें। ऑप्शन एक वित्तीय डेरिवेटिव होता है, जिसका मतलब है कि इसकी कीमत किसी अन्य संपत्ति (जैसे स्टॉक्स, कमोडिटी या इंडेक्स) की कीमत पर निर्भर करती है। ऑप्शन के दो मुख्य प्रकार होते हैं: कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन

ऑप्शन ट्रेडिंग के दो मुख्य प्रकार:

  1. कॉल ऑप्शन (Call Option):

    • कॉल ऑप्शन आपको एक निश्चित कीमत (Strike Price) पर एक विशेष संपत्ति को खरीदने का अधिकार देता है, लेकिन इसे करने की कोई बाध्यता नहीं होती।
    • यदि संपत्ति की कीमत बढ़ जाती है, तो कॉल ऑप्शन का मूल्य भी बढ़ सकता है, जिससे आपको लाभ होता है।
    • उदाहरण: अगर आपने XYZ कंपनी के स्टॉक पर कॉल ऑप्शन खरीदा है, जिसकी Strike Price ₹100 है, और स्टॉक की कीमत बढ़कर ₹120 हो जाती है, तो आप स्टॉक को ₹100 में खरीद सकते हैं और ₹120 में बेचकर लाभ कमा सकते हैं।
  2. पुट ऑप्शन (Put Option):

    • पुट ऑप्शन आपको एक निश्चित कीमत (Strike Price) पर एक विशेष संपत्ति को बेचने का अधिकार देता है, लेकिन इसे करने की कोई बाध्यता नहीं होती।
    • अगर संपत्ति की कीमत घट जाती है, तो पुट ऑप्शन का मूल्य बढ़ सकता है, जिससे आपको लाभ होता है।
    • उदाहरण: यदि आपने XYZ कंपनी के स्टॉक पर पुट ऑप्शन खरीदी है, जिसकी Strike Price ₹100 है, और स्टॉक की कीमत घटकर ₹80 हो जाती है, तो आप स्टॉक को ₹100 में बेच सकते हैं और ₹80 में खरीदकर लाभ कमा सकते हैं।

ऑप्शन ट्रेडिंग में कुछ प्रमुख शब्द:

  1. Strike Price: वह मूल्य जिस पर ऑप्शन का अधिकार खरीदा या बेचा जा सकता है।
  2. Premium: ऑप्शन के लिए जो कीमत दी जाती है, यानी वो राशि जो खरीदार ऑप्शन को खरीदने के लिए बेचने वाले को देता है।
  3. Expiration Date: वह तारीख जब ऑप्शन की वैधता समाप्त हो जाती है।
  4. In the Money (ITM): ऑप्शन तब होता है जब उसका स्ट्राइक प्राइस मौजूदा बाजार मूल्य के पक्ष में होता है (उदाहरण: कॉल ऑप्शन के लिए अगर बाजार मूल्य स्ट्राइक प्राइस से ज्यादा है)।
  5. Out of the Money (OTM): ऑप्शन तब होता है जब उसका स्ट्राइक प्राइस मौजूदा बाजार मूल्य के खिलाफ होता है (उदाहरण: कॉल ऑप्शन के लिए अगर बाजार मूल्य स्ट्राइक प्राइस से कम है)।
  6. At the Money (ATM): ऑप्शन तब होता है जब उसका स्ट्राइक प्राइस और मौजूदा बाजार मूल्य लगभग समान होते हैं।

ऑप्शन ट्रेडिंग के लाभ:

  • लाभ के अवसर: ऑप्शन आपको सीमित जोखिम के साथ बड़ी रिटर्न की संभावना प्रदान करता है।
  • विविधता: आप बाजार के विभिन्न रुझानों (जैसे तेजी, मंदी या स्थिरता) पर लाभ कमा सकते हैं।
  • रिस्क प्रबंधन: ऑप्शन का उपयोग जोखिम को सीमित करने के लिए किया जा सकता है, खासकर अगर आप एक लंबी अवधि के निवेशक हैं।

ऑप्शन ट्रेडिंग के जोखिम:

  • नुकसान की सीमा: यदि आप ऑप्शन खरीदार हैं, तो आपका अधिकतम नुकसान प्रीमियम तक सीमित होता है, लेकिन अगर आप ऑप्शन बेचते हैं तो आपके नुकसान की कोई सीमा नहीं हो सकती।
  • समय सीमा: ऑप्शन की एक एक्सपायरी डेट होती है, और अगर आपको उस तारीख से पहले लाभ नहीं होता, तो ऑप्शन बेकार हो सकता है।
  • जटिलता: ऑप्शन ट्रेडिंग को समझना और सही तरीके से उपयोग करना कुछ जटिल हो सकता है, खासकर नए निवेशकों के लिए।

निष्कर्ष:

ऑप्शन ट्रेडिंग एक उन्नत निवेश रणनीति है, जो लाभ कमाने के विभिन्न तरीके प्रदान करती है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। यदि आप ऑप्शन ट्रेडिंग में रुचि रखते हैं, तो इसे समझने के लिए एक मजबूत शोध और अनुभव जरूरी है। शुरुआत में, इसे छोटे निवेशों से शुरू करना और अपनी जोखिम क्षमता को समझना अच्छा होता है।

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