पिवट प्वाइंट्स (Pivot Points) टेक्निकल एनालिसिस का एक महत्वपूर्ण टूल है, जो सपोर्ट और रेसिस्टेंस लेवल को पहचानने में मदद करता है। इसका उपयोग इंट्राडे और स्विंग ट्रेडिंग में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
पिवट प्वाइंट क्या होते हैं?
पिवट प्वाइंट एक गणितीय फॉर्मूला पर आधारित होता है, जो पिछले दिन के हाई, लो और क्लोज प्राइस के आधार पर अगले दिन के लिए संभावित सपोर्ट और रेसिस्टेंस लेवल को दर्शाता है।
📌 फॉर्मूला:
पिवट प्वाइंट्स के प्रकार
🔹 स्टैंडर्ड पिवट प्वाइंट: सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका।
🔹 फिबोनाची पिवट प्वाइंट: इसमें फिबोनाची रेशियो का उपयोग किया जाता है।
🔹 कैमरिला पिवट प्वाइंट: यह छोटे मूवमेंट्स और इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए प्रभावी होता है।
🔹 वुडीज़ और डेमार्क पिवट प्वाइंट्स: एडवांस्ड लेवल पर उपयोग किए जाते हैं।
पिवट प्वाइंट्स का उपयोग कैसे करें?
✅ 1. सपोर्ट और रेसिस्टेंस की पहचान करना
- यदि प्राइस पिवट प्वाइंट (P) से ऊपर ट्रेड कर रही है, तो यह बुलिश संकेत होता है।
- यदि प्राइस पिवट प्वाइंट (P) से नीचे ट्रेड कर रही है, तो यह बेयरिश संकेत होता है।
✅ 2. एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स तय करना
- Buy Entry: जब प्राइस पिवट प्वाइंट को ऊपर तोड़ती है और R1 या R2 तक बढ़ने की संभावना होती है।
- Sell Entry: जब प्राइस पिवट प्वाइंट के नीचे गिरती है और S1 या S2 तक जाने की संभावना होती है।
✅ 3. स्टॉप-लॉस और प्रॉफिट-टारगेट सेट करना
- स्टॉप-लॉस: अगला सपोर्ट या रेसिस्टेंस लेवल स्टॉप-लॉस के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
- टेक प्रॉफिट: R1, R2 या S1, S2 के आसपास प्रॉफिट बुक किया जा सकता है।
✅ 4. ब्रेकआउट ट्रेडिंग
- अगर किसी महत्वपूर्ण सपोर्ट (S1/S2) या रेसिस्टेंस (R1/R2) को तोड़ा जाता है, तो ब्रेकआउट ट्रेडिंग का मौका मिल सकता है।
उदाहरण:
अगर Nifty का हाई: 19800, लो: 19600 और क्लोज: 19750 है, तो अगले दिन के पिवट प्वाइंट इस प्रकार होंगे:
- P = (19800 + 19600 + 19750) ÷ 3 = 19716
- S1 = (2 × 19716) - 19800 = 19632
- R1 = (2 × 19716) - 19600 = 19832
अब, यदि मार्केट 19716 से ऊपर खुलता है, तो यह बुलिश संकेत हो सकता है और ट्रेडर R1 या R2 तक के लक्ष्य सेट कर सकते हैं।
📌 पिवट प्वाइंट्स एक शक्तिशाली टूल हैं जो इंट्राडे और स्विंग ट्रेडर्स को सपोर्ट-रेसिस्टेंस, ब्रेकआउट और एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स की पहचान करने में मदद करते हैं।
📌 अन्य इंडिकेटर्स जैसे RSI, MACD और मूविंग एवरेज के साथ इनका उपयोग करने से ट्रेडिंग रणनीति और मजबूत हो सकती है। 🚀