ट्रेडिंग में रिस्क को कैसे सही तरीके से मैनेज करें?

राजेश पालशेतकर
0

 

📌 ट्रेडिंग में रिस्क को सही तरीके से मैनेज करने के बेस्ट तरीके

रिस्क मैनेजमेंट (Risk Management) एक सफल ट्रेडर बनने के लिए सबसे जरूरी स्किल है। यह आपकी पूंजी की सुरक्षा करता है, भावनात्मक निर्णयों से बचाता है और लंबे समय में प्रॉफिटेबल बने रहने में मदद करता है।

🔹 ट्रेडिंग में सबसे बड़ा नियम है: पहले अपना पैसा बचाओ, फिर प्रॉफिट कमाने की सोचो।


🔹 1️⃣ स्टॉप लॉस (Stop Loss) अनिवार्य रूप से लगाएं

📌 क्या है?
स्टॉप लॉस एक ऑटोमेटेड ऑर्डर होता है, जो किसी ट्रेड में प्री-सेट नुकसान होने पर उसे बंद कर देता है। इससे बड़े नुकसान से बचाव होता है।

📌 कैसे इस्तेमाल करें?

  • इंट्राडे ट्रेडिंग में – 1-2% का स्टॉप लॉस रखें।
  • स्विंग ट्रेडिंग में – 3-5% का स्टॉप लॉस सही रहेगा।
  • फॉरेक्स/क्रिप्टो में – ATR (Average True Range) के आधार पर स्टॉप लॉस सेट करें।

उदाहरण:
अगर आपने ₹100 पर स्टॉक खरीदा और स्टॉप लॉस ₹95 सेट किया, तो अगर प्राइस ₹95 पर आती है, तो ऑटोमैटिकली ट्रेड बंद हो जाएगा और ज्यादा नुकसान नहीं होगा।


🔹 2️⃣ रिस्क-रिवार्ड रेशियो (Risk-Reward Ratio) सेट करें

📌 क्या है?
यह बताता है कि आप एक ट्रेड में कितना रिस्क ले रहे हैं और कितना रिटर्न एक्सपेक्ट कर रहे हैं।

📌 सही रेशियो क्या है?
✅ कम से कम 1:2 या 1:3 रखें। यानी, अगर आप ₹10 का रिस्क ले रहे हैं, तो कम से कम ₹20 या ₹30 प्रॉफिट टारगेट होना चाहिए।

✅ अगर आपका रिस्क-रिवार्ड रेशियो 1:1 से कम है, तो वह ट्रेड लेना सही नहीं है।

📌 उदाहरण:
अगर आप ₹100 पर स्टॉक खरीदते हैं और स्टॉप लॉस ₹95 पर रखते हैं (₹5 का रिस्क), तो आपका प्रॉफिट टारगेट कम से कम ₹110 या ₹115 होना चाहिए।


🔹 3️⃣ एक ट्रेड में अपनी पूंजी का 1-2% से ज्यादा रिस्क न लें

📌 क्या है?
स्मार्ट ट्रेडर्स कभी भी एक ही ट्रेड में अपनी पूरी पूंजी रिस्क में नहीं डालते।

📌 कैसे करें?

  • अगर आपके पास ₹1,00,000 का कैपिटल है, तो किसी भी सिंगल ट्रेड में ₹1,000-₹2,000 (1-2%) से ज्यादा रिस्क न लें।
  • इससे आप कई बार नुकसान होने के बावजूद भी मार्केट में टिके रह सकते हैं।

फायदा:

  • 5 बार लगातार गलत ट्रेड होने पर भी आपका सिर्फ 5-10% कैपिटल ही लॉस होगा, न कि पूरा पैसा।

🔹 4️⃣ लीवरेज (Leverage) को सीमित रखें

📌 क्या है?
लीवरेज उधार लिया हुआ पैसा होता है, जो आपको अपने अकाउंट से ज्यादा बड़ी पोजिशन खोलने देता है।

📌 लीवरेज से खतरा क्यों?
✔ अगर ट्रेंड गलत हुआ, तो आपका नुकसान भी कई गुना बढ़ सकता है।
✔ बिगिनर्स को 5x से ज्यादा लीवरेज नहीं लेना चाहिए।
✔ प्रोफेशनल ट्रेडर्स भी 10x-20x से ज्यादा लीवरेज कम ही इस्तेमाल करते हैं।

स्मार्ट तरीका:

  • केवल कम रिस्क वाले ट्रेड में ही लीवरेज का उपयोग करें।
  • इंट्राडे ट्रेडिंग में कम से कम लीवरेज का प्रयोग करें।

🔹 5️⃣ ओवरट्रेडिंग से बचें

📌 क्या है?
बहुत ज्यादा ट्रेड लेने से आपका जोखिम और इमोशनल ट्रेडिंग बढ़ जाती है।

📌 कैसे बचें?
हर ट्रेड से पहले यह सोचें – क्या यह मेरे सेटअप के अनुसार सही ट्रेड है?
हर दिन ज्यादा से ज्यादा 3-5 क्वालिटी ट्रेड लें।
✔ जब भी लगातार 2-3 ट्रेड गलत हों, ट्रेडिंग रोक दें और स्ट्रेटेजी रिव्यू करें।


🔹 6️⃣ डाइवर्सिफिकेशन करें (Diversification)

📌 क्या है?
डाइवर्सिफिकेशन का मतलब है कि अपने पूरे पैसे को एक ही एसेट में न लगाएं, बल्कि अलग-अलग जगह इन्वेस्ट करें।

📌 कैसे करें?
अलग-अलग स्टॉक्स में इन्वेस्ट करें।
स्टॉक्स, कमोडिटी और फॉरेक्स का बैलेंस बनाएं।
अगर आप लॉन्ग-टर्म ट्रेडर हैं, तो 4-5 इंडस्ट्रीज में इन्वेस्टमेंट करें।

फायदा:
अगर एक ट्रेड या एसेट क्लास फेल होता है, तो दूसरा ट्रेड नुकसान को बैलेंस कर सकता है।


🔹 7️⃣ ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का इस्तेमाल करें

📌 क्या है?
ट्रेलिंग स्टॉप लॉस एक डायनामिक स्टॉप लॉस होता है, जो प्राइस के मूवमेंट के साथ एडजस्ट होता रहता है।

📌 कैसे करें?
✔ अगर स्टॉक ₹100 पर खरीदा और यह ₹110 तक जाता है, तो ट्रेलिंग स्टॉप लॉस को ₹105 पर मूव कर दें।
✔ इससे अगर मार्केट गिर भी जाए, तो भी आपको प्रॉफिट ही मिलेगा।

फायदा:

  • आपका प्रॉफिट लॉक हो जाता है।
  • बड़ा नुकसान होने से बचाव होता है।

🔹 8️⃣ ट्रेडिंग जर्नल बनाएं और एनालिसिस करें

📌 क्या है?
हर ट्रेड को लिखने से आप अपने गलतियों और सही डिसीजन को पहचान सकते हैं।

📌 क्या लिखें?
✔ एंट्री और एग्जिट प्राइस
✔ रिस्क-रिवार्ड रेशियो
✔ कौन-सा इंडिकेटर सही काम कर रहा है?
✔ गलती क्या हुई और अगली बार क्या सुधार कर सकते हैं?

फायदा:
अगर आप अपनी गलतियों से सीखेंगे, तो धीरे-धीरे आपका ट्रेडिंग स्किल बहुत बेहतर हो जाएगा।


🔹 निष्कर्ष (Conclusion)

रिस्क मैनेजमेंट सही से फॉलो करने पर ही आप लॉन्ग-टर्म में सफल ट्रेडर बन सकते हैं।
हर ट्रेड में स्टॉप लॉस सेट करें और रिस्क-रिवार्ड रेशियो सही रखें।
ओवरट्रेडिंग और ज्यादा लीवरेज लेने से बचें।
डाइवर्सिफिकेशन और ट्रेलिंग स्टॉप लॉस का सही इस्तेमाल करें।
ट्रेडिंग जर्नल बनाकर अपनी गलतियों से सीखें।

💡 क्या आप अपनी ट्रेडिंग में सही रिस्क मैनेजमेंट कर रहे हैं? या कोई और सवाल है? पूछ सकते हैं! 😊📈

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top