फोरेक्स ट्रेडिंग कैसे काम करती है?

राजेश पालशेतकर
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फोरेक्स (Forex) ट्रेडिंग, जिसे विदेशी मुद्रा बाजार (Foreign Exchange Market) भी कहा जाता है, एक ऐसा बाजार है जहां एक मुद्रा को दूसरी मुद्रा के साथ बदला जाता है। फोरेक्स ट्रेडिंग दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तरल बाजार है, जिसमें रोज़ाना 6 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का कारोबार होता है। इसे सरल भाषा में समझते हैं:

फोरेक्स ट्रेडिंग का मूल सिद्धांत:

फोरेक्स ट्रेडिंग में एक देश की मुद्रा को दूसरे देश की मुद्रा के मुकाबले खरीदा या बेचा जाता है। इस ट्रेडिंग में मुद्रा जोड़ों (Currency Pairs) का उपयोग किया जाता है। उदाहरण के तौर पर:

  • EUR/USD (Euro/US Dollar) – यूरो और अमेरिकी डॉलर के बीच का संबंध।
  • GBP/JPY (British Pound/Japanese Yen) – ब्रिटिश पाउंड और जापानी येन के बीच का संबंध।

फोरेक्स ट्रेडिंग का तरीका:

  1. मुद्रा जोड़ना (Currency Pairs):
    फोरेक्स में, आप दो मुद्राओं का एक जोड़ा ट्रेड करते हैं। उदाहरण के लिए, EUR/USD में, EUR (यूरो) पहली मुद्रा है, और USD (अमेरिकी डॉलर) दूसरी मुद्रा है। जब आप इस जोड़े को खरीदते हैं, तो आप यूरो खरीदते हैं और अमेरिकी डॉलर बेचते हैं। इसके विपरीत, जब आप इसे बेचते हैं, तो आप यूरो बेचते हैं और अमेरिकी डॉलर खरीदते हैं।

  2. बीड (Bid) और आस्क (Ask):

    • बीड प्राइस: यह वह मूल्य है जिस पर ब्रोकर आपको एक मुद्रा को बेचने के लिए तैयार है।
    • आस्क प्राइस: यह वह मूल्य है जिस पर ब्रोकर आपको एक मुद्रा को खरीदने के लिए तैयार है।
      अंतर (Spread) – बीड और आस्क के बीच का अंतर स्प्रेड कहलाता है। यह ब्रोकर के लिए एक प्रकार का कमीशन होता है।
  3. लिवरेज (Leverage):
    फोरेक्स ट्रेडिंग में लिवरेज का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे आप अपनी पूंजी से कई गुना ज्यादा ट्रेड कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, 100:1 का लिवरेज का मतलब है कि आप अपनी $100 की पूंजी से $10,000 तक का व्यापार कर सकते हैं। हालांकि, लिवरेज आपके लाभ को बढ़ा सकता है, लेकिन इससे जोखिम भी बढ़ जाता है।

  4. लॉट्स (Lots):
    फोरेक्स में ट्रेडिंग आम तौर पर "लॉट्स" में की जाती है। एक स्टैंडर्ड लॉट 100,000 यूनिट्स का होता है। इसके अलावा, मिनी लॉट (10,000 यूनिट्स) और माइक्रो लॉट (1,000 यूनिट्स) भी होते हैं।

  5. पिप (Pip):
    एक पिप (Percentage in Point) एक छोटी सी इकाई होती है, जो मुद्रा की कीमत में बदलाव को दर्शाती है। उदाहरण के लिए, अगर EUR/USD 1.1000 से बढ़कर 1.1050 हो जाता है, तो यह 50 पिप्स का मूवमेंट है। यह आपकी ट्रेडिंग में लाभ और हानि को मापने में मदद करता है।

फोरेक्स मार्केट के घंटे:

फोरेक्स मार्केट सोमवार से शुक्रवार तक खुला रहता है और यह 24 घंटे चलता है। यह लगातार बदलता हुआ बाजार है क्योंकि दुनिया भर के अलग-अलग देशों में अलग-अलग टाइम ज़ोन होते हैं। फोरेक्स ट्रेडिंग का कोई विशिष्ट "क्लोज़िंग टाइम" नहीं होता है, क्योंकि यह वैश्विक स्तर पर चलता रहता है।

फोरेक्स ट्रेडिंग के प्रकार:

  1. स्पॉट मार्केट (Spot Market):
    यह एक तत्काल या तात्कालिक विनिमय है, जिसमें मुद्राओं का व्यापार किया जाता है और उसी समय भुगतान और आपूर्ति होती है।

  2. फॉरवर्ड्स (Forwards) और फ्यूचर्स (Futures):
    इनमें ट्रेडिंग एक भविष्य की तारीख पर होती है, जहाँ मुद्राओं को एक निश्चित मूल्य पर एक निर्धारित समय पर खरीदा और बेचा जाता है। ये आमतौर पर अधिक पेशेवर और संस्थागत निवेशकों द्वारा उपयोग किए जाते हैं।

फोरेक्स ट्रेडिंग के लाभ और जोखिम:

  • लाभ:

    • 24 घंटे खुला रहने वाला बाजार।
    • उच्च लिक्विडिटी (जल्दी खरीदी और बेची जा सकती हैं मुद्राएँ)।
    • लिवरेज का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे कम पूंजी से ज्यादा लाभ हो सकता है।
  • जोखिम:

    • उच्च लिवरेज के कारण नुकसान भी उतना ही बड़ा हो सकता है।
    • मार्केट की अस्थिरता, विशेषकर आर्थिक और राजनीतिक घटनाओं के कारण।

फोरेक्स ट्रेडिंग में सफल होने के लिए, बाजार के बारे में गहरी समझ, तकनीकी विश्लेषण, और जोखिम प्रबंधन की जरूरत होती है। ट्रेडिंग के शुरुआती दिनों में सही रणनीति और भावनाओं को नियंत्रित करना बेहद महत्वपूर्ण है।

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