शेयर मार्केट में क्रैश आने पर क्या करना चाहिए।

राजेश पालशेतकर
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   मार्केट में गिरावट को लेकर अनावश्यक घबराने की ज़रूरत नहीं है।  टेक्निकल विश्लेषण के आधार पर, कोरोना काल के मार्केट व्यवहार एक उदाहरण है, जहाँ शुरुआती गिरावट के बाद लगातार वृद्धि देखी गई थी।  कम समय सीमा (5-15 मिनट) पर बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है, लेकिन यह मार्केट का सामान्य व्यवहार है।   मार्केट में गिरावट के दौरान निवेशकों को अपने लक्ष्य स्पष्ट करने और योजना बनाने की सलाह दी गई है।  इंट्राडे ट्रेडिंग के लिए छोटे स्टॉप-लॉस के साथ योजना बनाना ज़रूरी  है। स्विंग ट्रेडिंग में भी छोटे स्टॉप-लॉस का उपयोग करने और मार्केट के दिशा स्पष्ट होने तक इंतज़ार करने की आवश्यकता है।  महत्वपूर्ण समर्थन स्तरों (जैसे 24000, 21000)  का  जब तक ये स्तर नहीं टूटते, तब तक बड़े पैमाने पर गिरावट की आशंका नहीं है। शेयरों के मूल्य में गिरावट को "डिस्काउंट" के रूप में देखने और  मजबूत आधार वाले शेयरों में निवेश बढ़ाने (एड-ऑन) की रणनीति बताई गई है।  इसके लिए  कुल निवेश राशि को कई हिस्सों में बाँटकर,  कम कीमतों पर  धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने की सलाह दी गई है।  कंपनी के लाभ, बिक्री, पीई अनुपात, प्रमोटर होल्डिंग आदि कारकों को देखकर मजबूत शेयरों की पहचान करने की बात कही गई है।  कमजोर शेयरों को बेचकर (या आंशिक रूप से बेचकर)  उससे प्राप्त धन का उपयोग मजबूत शेयरों में निवेश करने की रणनीति भी अच्छी है।  शेयर मार्केट के विश्लेषण में तकनीकी स्तरों और ऐतिहासिक पैटर्न का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है।  अंत में,  शांतचित्त रहने,  जोखिम प्रबंधन और योजनाबद्ध तरीके से निवेश करे ताकि शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव का डर न हो।
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